बिहार के व्यवहार न्यायालयों में कार्यरत कर्मचारियों की विभिन्न लंबित मांगों को लेकर बिहार राज्य Civil Court कर्मचारी संघ की ओर से 9 अगस्त को पटना के गर्दनीबाग धरना स्थल पर विशाल आमसभा आयोजित की जा रही है। संघ ने इस दौरान कर्मचारियों से जुड़ी 12 प्रमुख मांगों को प्रमुखता से उठाने की तैयारी की है।कर्मचारी संघ का कहना है कि न्यायालयों के दैनिक कामकाज में कर्मचारियों की महत्वपूर्ण भूमिका है, लेकिन लंबे समय से उनकी सेवा, पदोन्नति, वेतन, पदस्थापना और अन्य सुविधाओं से जुड़े कई मामले लंबित हैं। आमसभा के माध्यम से इन मांगों को सरकार और संबंधित न्यायिक प्राधिकारियों के समक्ष मजबूती से रखने की तैयारी है।

न्यायालय सहायकों के कैडर पुनर्गठन और वेतन पुनरीक्षण की मांग :
संघ की पहली और प्रमुख मांग न्यायालय सहायक के कैडर का 1 जनवरी 2006 से पुनर्गठन करते हुए 4600 ग्रेड पे के अनुरूप वेतन पुनरीक्षण किए जाने की है।कर्मचारी संघ का तर्क है कि न्यायालय सहायकों के कार्य की प्रकृति और जिम्मेदारियों को देखते हुए उन्हें राज्य सरकार तथा न्यायालय की अन्य शाखाओं में समान कार्य करने वाले सहायक प्रशाखा पदाधिकारियों के अनुरूप समान कार्य के लिए समान वेतन दिया जाना चाहिए।
वर्षों से लंबित पदोन्नति का मामला हो अविलंब समाप्त :
दूसरी मांग कर्मचारियों और पदाधिकारियों के दशकों से लंबित पदोन्नति मामलों को जल्द से जल्द निपटाने की है। संघ का कहना है कि लंबे समय तक पदोन्नति नहीं मिलने से कर्मचारियों के कैरियर और सेवा लाभ पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।
प्रोन्नति के स्थान पर जबरन MACP देने का विरोध :
संघ ने प्रोन्नति के नाम पर जबरन MACP देने की प्रक्रिया बंद करने की मांग की है। कर्मचारियों का कहना है कि उन्हें निर्धारित समयावधि और सेवा नियमों के अनुसार वास्तविक पदोन्नति का लाभ मिलना चाहिए।
सभी संवर्गों के कार्यों की स्पष्ट जिम्मेदारी तय हो :
कर्मचारी संघ ने सभी संवर्गों के कर्मचारियों के स्पष्ट कार्य दायित्व प्रकाशित करने की मांग भी रखी है। संघ के अनुसार कर्मचारियों पर उनकी निर्धारित जिम्मेदारी से अलग अनुचित कार्यभार डालना उचित नहीं है। इसलिए प्रत्येक संवर्ग के कार्य एवं दायित्व स्पष्ट रूप से निर्धारित किए जाने चाहिए।
अनुकंपा नियुक्ति में भेदभाव खत्म करने की मांग :
पांचवीं मांग न्यायिक कर्मचारियों के साथ कथित भेदभाव को समाप्त करते हुए अन्य राज्य कर्मचारियों की तरह शत-प्रतिशत अनुकंपा नियुक्ति लागू करने की है। संघ का कहना है कि सेवा के दौरान किसी कर्मचारी की मृत्यु होने पर उसके आश्रित परिवार को मिलने वाली अनुकंपा नियुक्ति व्यवस्था में न्यायिक कर्मचारियों के साथ समान व्यवहार होना चाहिए।
गृह जिला या प्रमंडल के अंतर्गत पदस्थापना के लिए पोर्टल की मांग:
कर्मचारियों की एक महत्वपूर्ण मांग गृह जिला या अपने प्रमंडल के अंतर्गत किसी जिले में पदस्थापना सुनिश्चित करने के लिए ऑनलाइन पोर्टल जारी करने की है।संघ का कहना है कि ऐसी व्यवस्था होने से कर्मचारियों को अपनी पसंद और पारिवारिक परिस्थितियों के अनुरूप पदस्थापना के लिए पारदर्शी तरीके से आवेदन करने का अवसर मिल सकेगा।
न्यायिक कर्मचारियों के लिए विशेष कैडर की मांग :
न्यायालयों की कार्यप्रणाली और कर्मचारियों की विशेष जिम्मेदारियों को देखते हुए संघ ने न्यायिक कर्मचारियों के लिए अलग और विशेष कैडर लागू करने की मांग की है।संघ का मानना है कि न्यायिक व्यवस्था की विशिष्ट प्रकृति को देखते हुए कर्मचारियों की सेवा संरचना भी उसी अनुरूप निर्धारित की जानी चाहिए।
शेट्टी आयोग के आलोक में भत्तों का पुनरीक्षण :
आठवीं प्रमुख मांग शेट्टी आयोग के आलोक में कर्मचारियों को मिलने वाले विभिन्न भत्तों का सातवें वेतन आयोग के अनुरूप पुनरीक्षण कर लागू करने की है।कर्मचारी संघ का कहना है कि समय के साथ महंगाई और कार्य की प्रकृति में बदलाव हुआ है, इसलिए कर्मचारियों को मिलने वाले भत्तों की भी वर्तमान परिस्थितियों के अनुसार समीक्षा आवश्यक है।
अनुचित व्यवहार और पूर्वाग्रह से परेशान करने की नीति बंद करने की मांग :
संघ ने न्यायिक अधिकारियों द्वारा कर्मचारियों को अनुचित तरीके से अथवा पूर्वाग्रह से ग्रस्त होकर परेशान किए जाने की शिकायतों को भी अपनी मांगों में शामिल किया है।कर्मचारी संघ चाहता है कि कर्मचारियों के साथ कार्यस्थल पर निष्पक्ष एवं सम्मानजनक व्यवहार सुनिश्चित किया जाए और किसी भी कर्मचारी को व्यक्तिगत पूर्वाग्रह के आधार पर परेशान न किया जाए।
कर्मचारियों और परिवार के लिए निशुल्क हेल्थ कार्ड :
दसवीं मांग के तहत सभी न्यायालय कर्मचारियों और उनके परिवारजनों के लिए निःशुल्क हेल्थ कार्ड जारी करने की मांग की गई है। संघ का कहना है कि कर्मचारियों और उनके आश्रित परिवारों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए ऐसी व्यवस्था आवश्यक है।
बच्चों के लिए शिक्षा भत्ता लागू करने की मांग :
संघ ने राज्य सरकार से केंद्र सरकार के कर्मचारियों की तरह न्यायालय कर्मचारियों के बच्चों के लिए भी शिक्षा भत्ता लागू करने की मांग की है।कर्मचारी संघ का कहना है कि बच्चों की शिक्षा पर लगातार बढ़ते खर्च को देखते हुए शिक्षा भत्ता कर्मचारियों के लिए महत्वपूर्ण सुविधा साबित हो सकता है।
पुरानी पेंशन योजना लागू करने की मांग :
बारहवीं और अंतिम प्रमुख मांग न्यायालय कर्मचारियों के लिए पुरानी पेंशन योजना (OPS) लागू करने की है। संघ ने राज्य सरकार से अन्य राज्यों में लागू व्यवस्थाओं का हवाला देते हुए बिहार के न्यायालय कर्मचारियों के लिए भी पुरानी पेंशन व्यवस्था लागू करने की मांग की है।
आमसभा में उठेंगी कर्मचारियों की समस्याएं 9 अगस्त को होने वाली आमसभा में इन सभी मांगों को प्रमुखता से रखा जाएगा। कर्मचारी संघ का उद्देश्य राज्यभर के न्यायालय कर्मचारियों को एक मंच पर लाकर उनकी समस्याओं और अधिकारों को मजबूती से सामने रखना है।संघ की ओर से कर्मचारियों से अधिक से अधिक संख्या में आमसभा में पहुंचने और संगठन को मजबूत बनाने की अपील की गई है। अब देखना होगा कि इन 12 मांगों पर सरकार और संबंधित स्तर से क्या पहल की जाती है और लंबे समय से लंबित मामलों के समाधान की दिशा में क्या कदम उठाए जाते हैं।TazzaHeadlines बिहार के न्यायालय कर्मचारियों, सिविल कोर्ट, न्यायिक व्यवस्था और कर्मचारी संगठनों से जुड़ी हर महत्वपूर्ण गतिविधि पर लगातार नजर रखेगा।









